तेरी शर्ट हमसे ज्यादा सफ़ेद क्यों की तर्ज़ पर मीनारों और गुम्बदों को ऊँचा करने और सड़कों पर नमाज़ व आरती करने की आज होड़ लगी है.धार्मिक होने का प्रदर्शन खूब हो रहा है जबकि ऐसी धार्मिकता हमें धर्मान्धता की ओर घसीट ले जा रही है.जो खतरनाक है.देश की गंगा-जमनी संस्कृति को इससे काफी चोट पहुँच रही है.सर्व-धर्म समभाव हमारी पहचान है.सदियों पुरानी इस रिवायत को हम यूँही खो जाने नहीं देंगे. इस मंच के मार्फ़त हमारा मकसद परस्पर एकता के समान बिदुओं पर विचार करना है.अपेक्षित सहयोग मिलेगा, विशवास है. मतभेदों का भी यहाँ स्वागत है.वाद-ववाद से ही तो संवाद बनता है.





होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

on शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010



कहा जाता है कि हज़रत मोहम्मद [स] को आज के ही दिन  लगभग साढ़े चौदा सौ साल पहले अल्लाह ने पूरे संसार के लिए रहमत बनाकर भेजा था.इस दिन को लोग ईद-मिलादुन-नबी कहते हैं. इस रहमत का ही नतीजा है कि हिन्दुस्तान का एक सूफी-संत बुल्ले-शाह पंजाब में जाकर होली खेलता है और नाम अल्लाह और उसके रसूल का लेता है.यही हमारी सदियों पुरानी साझी-संस्कृति है.फेस बुक की दीवार पर पत्रकार अस्मा सलीम ने इसे उर्दू में चस्पां किया है.उनके आभार के साथ हम यहाँ मूल के साथ देवनागरी में लिप्यान्तरण दे रहे हैं.






होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

नाम नबी की रतन चढी, बूँद पडी इल्लल्लाह
रंग-रंगीली उही खिलावे, जो सखी होवे फ़ना-फी-अल्लाह
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

अलस्तु बिरब्बिकुम पीतम बोले, सभ सखियाँ ने घूंघट खोले
क़ालू बला ही यूँ कर बोले, ला-इलाहा-इल्लल्लाह
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

नह्नो-अकरब की बंसी बजायी, मन अरफ़ा नफ्सहू की कूक सुनायी
फसुम-वजहिल्लाह की धूम मचाई, विच दरबार रसूल-अल्लाह
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

हाथ जोड़ कर पाऊँ पडूँगी आजिज़ होंकर बिनी करुँगी
झगडा कर भर झोली लूंगी, नूर मोहम्मद सल्लल्लाह
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

फ़ज अज्कुरनी होरी बताऊँ , वाश्करुली पीया को रिझाऊं
ऐसे पिया के मैं बल जाऊं, कैसा पिया सुब्हान-अल्लाह 
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

सिबगतुल्लाह की भर पिचकारी, अल्लाहुस-समद पिया मुंह पर मारी
नूर नबी [स] डा हक से जारी, नूर मोहम्मद सल्लल्लाह
बुला शाह दी धूम मची है, ला-इलाहा-इल्लल्लाह
होरी खेलूंगी कह कर बिस्मिल्लाह

26 टिप्पणियाँ:

शेरघाटी ने कहा…

हाथ जोड़कर पाऊँ पडूँगी आजिज़ होकर बिनी करुँगी
झगडा कर भर झोली लूंगी , नूर मोहम्मद सल्लाह !!
क्या कहना है..

सतीश सक्सेना ने कहा…

ईश्वर करे आप जैसे लेखक और पैदा हों , इस देश को जरूरत है ऐसे नेक इंसानों की ! होली पर शुभकामनायें !!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

बुल्लेशाह यूँ ही महान नहीं हो गए!

मिहिरभोज ने कहा…

वाह वाह....बहुत अच्छालगा पढकर...

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

....मुबारकां ....मुबारकां ...!!!!

vikas mehta ने कहा…

bhut badhiya hai dhanywaad isi tarah miljulkar rhe klyan ho sabkaa desh aage badhe

T.M.Zeyaul Haque ने कहा…

@ सतीश जी से सहमत....आपके सभी लेख अहम होते हैं..

rashmi ravija ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया,इतनी नायाब रचना से रु-ब-रु करवाने का....आप जैसे नेक बन्दों की कोशिशों से ही यह दुनिया जीने लायक है..
आपको भी होली बहुत बहुत मुबारक

खुशदीप सहगल ने कहा…

बेशक मंदिर-मस्जिद ढा दे
बुल्ले शाह ये कहता,
पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो,
उस दिल में ईश्वर रहता...

जय हिंद...

Where ने कहा…

sab log aisey hi ho jaayen. atankvad na phailayein.

Anil Pusadkar ने कहा…

sharoz bhai holi mubaraq ho.aapko yaad karte hain,kabhi baat karne kaa man bhi hota hai.co no mail kar de to achcha lagrga. anil.pusadkar@gmail.com

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी...सच है दिलों में प्यार की भावना ही होनी चाहिए...सब त्योहारों को मिल कर मनाने का जज्बा.....

आपको होली की शुभकामनायें

डॉ टी एस दराल ने कहा…

भेद भाव को भूलकर , सब मीठी बोलें बोली
जेम्स, जावेद, श्याम और संता , सब मिलकर खेलें होली।

ईद और होली की मुबारक।

गिरीश पंकज ने कहा…

ek mahaan aur durlabh rachanaa ko aaj ke daur me sulabh karane ke liye aabhar. aise path bade zarooree hai. badhai eid kee..

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

अपनी मीटिंग में तो हम साक्षात मिल लिए थे प्‍यार भरे दिलों से। उन खुशबुओं से सदा सराबोर रहेंगे हम।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट!

होली और ईद की हार्दिक शुभकामनाएं!

Aflatoon ने कहा…

अति सुन्दर । शहरोज भाई होली और ईद की मुबारकबाद लें । सप्रेम,

Vivek Rastogi ने कहा…

वाह पढ़कर ही मजा आ गया।

होली की शुभकामनाएँ

सुरेश यादव ने कहा…

ईद और होली के अवसर पर इस रचना का रंग देश को एकता के रंग से सराबोर कर गया धन्यवाद.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

होली की हार्दिक शुभकामनाये.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ye rachna anupam hai......padhkar ek sukun sa hua

shikha varshney ने कहा…

aapka jazba kabile tareef hai...yun hi banaye rakhiyega..shubhkamnayen.

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

हमारा देश सूफियों और भक्ति रस के उदार महात्माओं से भरा रहा है. काश सभी लोग सांप्रदायिक सद्भाव और इसके आनंद को समझें, महसूस करें..

इस रचना को प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत शुक्रिया...

अहफ़ाज रशीद ने कहा…

maashallah.......

jenny shabnam ने कहा…

shahroz sahab,
awesh ji ke scrap par bhraman karte hue aap mere blog par aaye they, aaj main tafreeh par nikli to aapke blog par pahunch gai.
hori khelungi kah kar bismillah padhi, aapki soch aur jazbaa ko salaam. bahut shubhkaamnayen.

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